मानसून के दौरान आसमानी बिजली सिर्फ तेज बारिश और गरजने वाले बादलों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भारत में हर साल सैकड़ों लोगों की जान लेने वाला गंभीर प्राकृतिक खतरा है। हाल के महीनों में भी अलग-अलग राज्यों से बिजली गिरने से मौतों की घटनाएं सामने आती रही हैं। झारखंड में एक ही 24 घंटे के दौरान अलग-अलग घटनाओं में 7 लोगों की मौत दर्ज हुई, जबकि मध्य प्रदेश के शहडोल में एक 11 साल के बच्चे समेत 3 लोगों की जान बिजली गिरने से चली गई।
यह खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा उपलब्ध आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। Centre for Science and Environment के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच भारत में 1,456 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई, यानी उस अवधि में औसतन करीब पांच लोगों की जान हर दिन गई।
ऐसे में बिजली चमकते ही सिर्फ बारिश से बचने की कोशिश करना काफी नहीं है। यह समझना जरूरी है कि आसमान में बिजली बनती कैसे है, वह जमीन तक कैसे पहुंचती है, पेड़ के नीचे खड़ा होना इतना खतरनाक क्यों है, खुले खेत या मैदान में फंस जाएं तो क्या करना चाहिए और क्या बिजली गिरने से पहले कोई भरोसेमंद चेतावनी मिल सकती है। सही जानकारी कई बार कुछ सेकंड के फैसले को जीवन और मौत के बीच का फर्क बना सकती है।
बिजली गिरने का कोई ऐसा सार्वभौमिक संकेत नहीं है जिससे व्यक्ति निश्चित रूप से कुछ मिनट पहले बता सके कि आसमानी बिजली से कैसे बचें या उसी जगह पर स्ट्राइक होने वाली है। इसलिए बाल खड़े होना जैसी पुरानी बातों को वार्निंग सिस्टम की तरह पेश नहीं करना चाहिए। इसके बजाय IMD के आंधी/बिजली गिरने की चेतावनी और स्थानीय चेतावनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। IMD की सेवाओं में जिला-स्तरीय वार्निंग्स और Damini Lightning ऐप भी उपलब्ध हैं।
बादलों के अंदर आसमानी बिजली बनती कैसे है?

आसमानी बिजली बनने की प्रक्रिया की शुरुआत बड़े गरज वाले बादलों से होती है। गर्मी के कारण जमीन और जल स्रोतों से पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है। ऊपर पहुंचने पर वातावरण ठंडा होने के कारण यह जलवाष्प संघनित होकर बादल बनाती है। जब बादल बहुत ऊंचाई तक विकसित होते हैं तो उनके भीतर पानी की बूंदों, बर्फ के छोटे कणों और ओलों जैसे कणों की लगातार आवाजाही शुरू हो जाती है।
इन कणों को ऊपर ले जाने वाली तेज हवाएं और नीचे की ओर आने वाले भारी बर्फीले कण आपस में टकराते रहते हैं। इन टक्करों के दौरान विद्युत आवेशों का अलगाव होता है। धीरे-धीरे बादल के अलग-अलग हिस्सों में धनात्मक और ऋणात्मक आवेश जमा होने लगते हैं।
आम तौर पर गरज वाले बादल के निचले हिस्से में ऋणात्मक आवेश का जमाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि ऊपरी हिस्सों में धनात्मक आवेश अधिक पाया जा सकता है। इसी दौरान जमीन की सतह पर भी आवेशों का पुनर्वितरण होता है।
जब इन आवेशों के बीच विद्युत विभव का अंतर इतना बढ़ जाता है कि सामान्य परिस्थितियों में कुचालक रहने वाली हवा उसे रोक नहीं पाती, तब हवा का विद्युत विघटन शुरू हो सकता है। यहीं से बिजली के धरती तक पहुंचने का रास्ता बनने लगता है।
आसमान से बिजली जमीन तक कैसे पहुंचती है?
बिजली गिरना वास्तव में एक ही पल में बादल से जमीन तक सीधी चमक पहुंच जाने जितना सरल नहीं है। बादल के भीतर से एक कमजोर विद्युत मार्ग नीचे की ओर बढ़ता है। जब यह मार्ग जमीन के पास पहुंचता है तो जमीन से भी विपरीत आवेश वाला एक मार्ग ऊपर की ओर विकसित हो सकता है।
जब दोनों मार्ग जुड़ते हैं तो अत्यंत तेज विद्युत धारा उस बने हुए रास्ते से गुजरती है। हमें इसी तीव्र विद्युत विसर्जन के रूप में बिजली की चमक दिखाई देती है। इसीलिए यह कहना कि बिजली हमेशा केवल सबसे छोटी दूरी देखकर किसी स्थान पर गिरती है, पूरी तस्वीर नहीं बताता। बिजली का रास्ता कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें बादल की संरचना, जमीन की स्थिति और आसपास मौजूद ऊंची वस्तुएं भी शामिल हैं।
बिजली के दौरान आसपास की हवा बहुत तेजी से गर्म होती है। यह अचानक गर्म होना हवा के तेजी से फैलने का कारण बनता है और उससे दबाव की तरंग पैदा होती है। इसी तरंग को हम गरज या बिजली के रूप में सुनते हैं।
बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और गरज बाद में सुनाई देती है क्योंकि प्रकाश की गति ध्वनि से बहुत अधिक होती है। इसलिए चमक और आवाज के बीच का अंतर देखकर बिजली की दूरी का मोटा अंदाजा भी लगाया जा सकता है।
पेड़ों और ऊंची वस्तुओं के पास बिजली गिरने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
बारिश के दौरान सबसे आम और खतरनाक गलतियों में से एक है अकेले पेड़ के नीचे खड़े होकर बारिश से बचना। किसी ऊंची वस्तु के आसपास बिजली गिरने की संभावना का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि वह जमीन और बादल के बीच विद्युत मार्ग बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बिजली हर बार सबसे ऊंचे पेड़ पर ही गिरेगी। पेड़ पर बिजली गिरने की स्थिति में उसके आसपास मौजूद व्यक्ति भी घायल हो सकता है। बिजली पेड़ से जमीन तक फैल सकती है, पेड़ के हिस्से फट सकते हैं और आसपास खड़े व्यक्ति तक विद्युत धारा पहुंच सकती है।
इसलिए बारिश और गरज के दौरान अकेले पेड़, बिजली के खंभे, टावर, खुले मैदान में खड़ी ऊंची संरचना या दूसरी ऊंची वस्तुओं के नीचे शरण लेना सुरक्षित तरीका नहीं है। यही कारण है कि “बारिश तेज है, थोड़ी देर पेड़ के नीचे रुक जाते हैं” जैसी आदत बेहद खतरनाक हो सकती है।
खुले खेत और मैदान में फंस जाएं तो खतरा इतना बढ़ क्यों जाता है?
खुले मैदान में व्यक्ति के आसपास कोई सुरक्षित इमारत या दूसरी उपयुक्त जगह नहीं होती। ऐसे स्थान पर व्यक्ति आसपास की जमीन के मुकाबले अपेक्षाकृत ऊंचा बिंदु बन सकता है, खासकर यदि वह खड़ा हो। अगर आप खेत, मैदान या किसी खुले इलाके में हैं और अचानक गरज-चमक शुरू हो जाए, तो जितनी जल्दी संभव हो किसी सुरक्षित, पूरी तरह बंद इमारत या उपयुक्त बंद वाहन तक पहुंचना सबसे बेहतर विकल्प है।
अगर तुरंत सुरक्षित जगह तक पहुंचना संभव नहीं है, तो खुले क्षेत्र में जमीन पर लेट जाना भी सही रणनीति नहीं है। जमीन के संपर्क में शरीर का क्षेत्र बढ़ने से बिजली के जमीन के रास्ते फैलने पर जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को जमीन के संपर्क को न्यूनतम रखते हुए नीचे झुककर रहना चाहिए और सुरक्षित स्थान मिलने तक ऊंची वस्तुओं, पानी और समूह से दूरी बनाए रखनी चाहिए। लेकिन यह केवल अंतिम उपाय है—सबसे सुरक्षित तरीका पहले से मौसम की चेतावनी देखकर खुले क्षेत्र में जाने से बचना है।
बारिश में नदी, तालाब और पानी के आसपास रहना खतरनाक क्यों है?

गरज के साथ बारिश हो रही हो तो नदी, तालाब, झील, स्विमिंग पूल या किसी अन्य जल स्रोत के पास रहना सुरक्षित नहीं है। पानी बिजली का “चुंबक” नहीं है, लेकिन बिजली गिरने की स्थिति में विद्युत धारा जमीन और पानी के आसपास फैल सकती है। पानी में मौजूद व्यक्ति के पास सुरक्षित बचाव का विकल्प भी सीमित होता है।
इसलिए अगर मौसम खराब होने लगे तो तुरंत पानी से बाहर निकलें और किसी सुरक्षित बंद जगह में जाएं। सिर्फ बारिश से बचने के लिए तालाब या नदी के किनारे किसी पेड़ या छोटी संरचना के नीचे खड़ा होना सुरक्षा नहीं देता।
बिजली चमकने के समय घर के अंदर क्या सावधानी रखनी चाहिए?
बंद और उचित रूप से सुरक्षित इमारत खुले मैदान की तुलना में काफी बेहतर जगह है, लेकिन घर के अंदर होने का मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में कोई जोखिम नहीं है।
गरज-चमक के दौरान खिड़की, दरवाजे और बालकनी से दूरी रखना बेहतर है। बिजली से जुड़े उपकरणों और तार वाली चीजों से अनावश्यक संपर्क से बचना चाहिए। बिजली गिरने के दौरान नल, पाइप या पानी से जुड़े धातु के हिस्सों के संपर्क में लंबे समय तक रहना भी उचित नहीं है।
अगर मौसम खराब होने से पहले संभव हो तो संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित तरीके से बिजली के स्रोत से अलग कर देना बेहतर है। हालांकि बिजली के दौरान प्लग निकालने के लिए खुद जोखिम लेकर बिजली के तार या उपकरण को छूना सही नहीं है।
क्या मोबाइल चलाने से बिजली इंसान पर गिरती है?
सिर्फ मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से आसमानी बिजली आपकी ओर आकर्षित होती है—यह दावा सही नहीं है। मोबाइल नेटवर्क या फोन अपने आप बादल से बिजली खींचने का काम नहीं करते। इसलिए खुले में मोबाइल इस्तेमाल करते हुए बिजली गिरने का खतरा मोबाइल की वजह से नहीं बढ़ता।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है: अगर आप खुले मैदान में खड़े हैं तो मोबाइल छोड़ने से भी आप सुरक्षित नहीं हो जाते। असली खतरा आपका खुले स्थान पर होना है। इसलिए बारिश और गरज के दौरान फोन को लेकर मिथक पर ध्यान देने के बजाय सबसे जरूरी काम यह है कि आप सुरक्षित इमारत या बंद वाहन में पहुंचें।
क्या बिजली गिरने से पहले कोई संकेत मिलता है?
बिजली गिरने से पहले ऐसा कोई भरोसेमंद संकेत नहीं है जिसे देखकर कोई व्यक्ति निश्चित रूप से बता सके कि कुछ सेकंड बाद इसी जगह बिजली गिरेगी। इसलिए ऐसे दावों से सावधान रहना चाहिए। लेकिन गरज वाला तूफान खुद एक गंभीर चेतावनी है।
अगर आप बिजली की चमक देख रहे हैं और उसकी गरज सुन रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप उस तूफानी बादल से पर्याप्त दूरी पर नहीं हैं कि खतरे को नजरअंदाज किया जा सके। बाल खड़े होना या त्वचा पर झनझनाहट महसूस होना जैसी असामान्य संवेदनाएं बिजली गिरने से ठीक पहले विद्युत क्षेत्र के बहुत मजबूत होने का संकेत हो सकती हैं।
ऐसी स्थिति में इसे किसी बिजली गिरने की पक्की भविष्यवाणी की तरह नहीं, बल्कि तुरंत सुरक्षित जगह खोजने की आपात चेतावनी की तरह लेना चाहिए। सबसे भरोसेमंद बचाव तरीका किसी संकेत का इंतजार करना नहीं, बल्कि गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर पहुंच जानाहै।
बिजली गिरने से बचने के लिए सबसे जरूरी नियम क्या हैं?
अगर गरज के साथ बारिश हो रही है, तो कुछ बुनियादी सावधानियां जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं:
- गरज सुनाई दे रही है तो तुरंत सुरक्षित बंद जगह की तलाश करें।
- खुले खेत, मैदान, पहाड़ी चोटी या ऊंचे स्थान पर न रहें।
- अकेले या ऊंचे पेड़ के नीचे शरण न लें।
- बिजली के खंभे, टावर, बाड़ और दूसरी ऊंची संरचनाओं से दूर रहें।
- नदी, तालाब, झील और दूसरे जल स्रोतों से बाहर निकलें।
- खुले क्षेत्र में लोगों के बड़े समूह में एक साथ न खड़े हों।
- यदि आप किसी खुले स्थान में फंस गए हैं, तो जमीन पर सीधे न लेटें; सुरक्षित जगह मिलने तक नीचे झुककर शरीर को जितना संभव हो जमीन से कम संपर्क में रखें।
- घर के अंदर खिड़कियों, बालकनी और बाहरी दरवाजों से दूरी रखें।
- मौसम विभाग या स्थानीय प्रशासन की आकाशीय बिजली संबंधी चेतावनियों को नजरअंदाज न करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिजली गिरने का इंतजार करके उसके बाद बचने की कोशिश न करें। जब तक बिजली की चमक दिखाई दे रही है और गरज सुनाई दे रही है, तब तक तूफान को सक्रिय मानकर सावधानी बरतना बेहतर है।
बिजली गिरने के बाद भी खतरा खत्म नहीं होता
कई लोग पहली तेज बारिश या बिजली की चमक के बाद यह मान लेते हैं कि अब खतरा निकल गया। ऐसा करना सुरक्षित नहीं है। गरज वाला तूफान एक ही जगह स्थिर नहीं रहता और उसके आसपास भी बिजली गिर सकती है। इसलिए पहली चमक के बाद तुरंत बाहर निकलने के बजाय मौसम के शांत होने और पर्याप्त समय तक गरज न सुनाई देने का इंतजार करना बेहतर है।
अगर किसी व्यक्ति पर बिजली गिर जाए तो उसे छूने से दूसरे व्यक्ति को बिजली नहीं लगती। इसलिए घायल व्यक्ति की मदद करने से डरना नहीं चाहिए। तुरंत आपात चिकित्सा सहायता बुलाना और जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार/CPR शुरू करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
बिजली गिरने से घायल व्यक्ति को जलन, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, हृदय संबंधी समस्या या अन्य गंभीर चोट हो सकती है, इसलिए उसे चिकित्सकीय जांच की जरूरत होती है—even अगर वह कुछ समय बाद होश में आ जाए।
आसमानी बिजली से बचने का सबसे आसान तरीका: खतरे को पहले पहचानें
आसमानी बिजली को रोकना इंसान के हाथ में नहीं है, लेकिन उससे होने वाली मौतों और चोटों का जोखिम काफी हद तक समय रहते सुरक्षित जगह पहुंचकर कम किया जा सकता है। बारिश शुरू होना अकेला खतरा नहीं है।
असली चेतावनी तब है जब बारिश के साथ गरज-चमक वाला तूफान विकसित हो रहा हो। ऐसे समय खेत में काम करते रहना, पेड़ के नीचे रुकना, तालाब या नदी के किनारे खड़े रहना या खुले मैदान में इंतजार करना जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए अगली बार आसमान में तेज चमक दिखाई दे और उसके बाद गरज सुनाई दे, तो उसे सिर्फ बारिश का सामान्य हिस्सा न समझें। पहला काम सुरक्षित जगह ढूंढना होना चाहिए—बिजली की अगली चमक का इंतजार करना नहीं।



