देशभर में मानसून अब अपना विकराल रूप दिखा रहा है। गुजरात के कई इलाकों में तबाही मचाने के बाद अब असम बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी सहित उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से टूट गया है, हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और लाखों लोग राहत शिविरों या अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार, असम बाढ़ से इस बार 6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि करीब 800 गांव पानी में डूब चुके हैं। बाढ़ के कारण सड़कें, पुल, तटबंध और अन्य बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में बिजली और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने से लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने की घटना के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। इसके चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ फैल गई। दूसरी ओर, राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं।
इस लेख में जानिए असम बाढ़ की मौजूदा स्थिति, सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन-कौन से हैं, अब तक कितने लोगों की मौत हुई है, राहत एवं बचाव कार्य कहां तक पहुंचे हैं और राज्य सरकार ने इस आपदा को लेकर क्या ताजा जानकारी साझा की है।
असम बाढ़: भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र के बढ़ते जलस्तर से 6 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 800 गांव जलमग्न

देशभर में मानसून अब अपना विकराल रूप दिखा रहा है। गुजरात के कई इलाकों में भारी तबाही मचाने के बाद अब असम बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी सहित उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से टूट गया है, हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और लाखों लोग राहत शिविरों या अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार, असम बाढ़ से इस बार 6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि करीब 800 गांव पानी में डूब चुके हैं। बाढ़ के कारण सड़कें, पुल, तटबंध और अन्य बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी पर भी इसका गहरा असर पड़ा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में आ गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने की घटना के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। इसके चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ फैल गई। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
वहीं, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सेना, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि कई इलाकों में अभी भी बचाव अभियान जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित परिवारों तक हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की है।
इस बीच मौसम विभाग और प्रशासन लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है, वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और हालात सामान्य होने तक राहत एवं बचाव अभियान बिना रुके जारी रहेगा।
असम बाढ़ से सबसे अधिक कौन-कौन से जिले प्रभावित हैं?

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, असम बाढ़ का सबसे अधिक असर राज्य के ऊपरी असम के जिलों में देखने को मिला है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट चुका है, जबकि अनेक स्थानों पर राहत शिविरों में लोगों को सुरक्षित रखा गया है।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चराईदेव, शिवसागर और जोरहाट शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चराईदेव जिले में करीब 1.90 लाख, शिवसागर में 1.50 लाख से अधिक और जोरहाट में लगभग 1.40 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा गोलाघाट और नगाांव समेत कई अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, रविवार तक राज्य के पांच प्रमुख जिलों में 5.24 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे। हालांकि कुछ इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है।
बाढ़ से बढ़ा जान-माल का नुकसान

लगातार बनी हुई असम बाढ़ की स्थिति ने सिर्फ लोगों के घरों को ही नहीं बल्कि राज्य के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई तटबंध टूट गए हैं, जबकि सड़कें और छोटे-बड़े पुल क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। कई गांवों में बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं।
आपदा के कारण खेती योग्य जमीन भी बड़ी मात्रा में पानी में डूब गई है। धान और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पशुधन पर भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में चारे और सुरक्षित आश्रय की कमी हो गई है।
इस वर्ष असम बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो चुकी है। हाल ही में चराईदेव जिले में दो और लोगों की मौत की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रहा है।
राहत और बचाव कार्य में जुटी सरकार, सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें

असम बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार तेज किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सेना, पुलिस और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं। प्राथमिकता उन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की है, जो अभी भी बाढ़ग्रस्त गांवों में फंसे हुए हैं।
प्रशासन के अनुसार अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है, जहां उन्हें भोजन, पीने का साफ पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई इलाकों में नावों के जरिए लोगों को बाहर निकाला जा रहा है, क्योंकि सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। वहीं, चिकित्सा दल भी राहत शिविरों में पहुंचकर लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।
असम बाढ़ को लेकर सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने की घटना के कारण असम में बाढ़ की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इसके चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे कई नए इलाकों में पानी भर गया।
सरकार का कहना है कि प्रभावित जिलों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत सामग्री तथा बचाव दल भेजे जा रहे हैं। प्रशासन स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में जलस्तर धीरे-धीरे कम होने की खबर है, लेकिन कई जिलों में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
असम बाढ़ ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि पूर्वोत्तर भारत हर वर्ष मानसून के दौरान गंभीर प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करता है। फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, राहत सामग्री पहुंचाना और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द बहाल करना है।



