देशभर के वकीलों के बीच इन दिनों Bar Council of India (BCI) और उसके चेयरमैन मनन मिश्रा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुरुआत एक विश्वविद्यालय के छात्रों के दाखिले और अधिवक्ता पंजीकरण (Enrollment) से जुड़े आदेश से हुई थी, लेकिन अब मामला इतना बढ़ चुका है कि कई वकील संगठन और युवा अधिवक्ता खुलकर मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में “मनन मिश्रा होश में आओ” और “अत्याचारी फरमान बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन का समर्थन All India Young Advocates Association और CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी किया। दूसरी ओर, BCI पहले ही अपना विवादित आदेश वापस ले चुका है और मनन मिश्रा छात्रों से सार्वजनिक रूप से खेद भी जता चुके हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ और वकीलों की नाराज़गी अभी तक खत्म क्यों नहीं हुई?
NALSAR विवाद कैसे शुरू हुआ? एक आदेश जिसने हजारों कानून छात्रों की चिंता बढ़ा दी

पूरे विवाद की शुरुआत NALSAR University of Law से जुड़े छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले एक आदेश से हुई। BCI की ओर से राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया गया कि NALSAR से वर्ष 2026 में स्नातक होने वाले छात्रों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण अगले आदेश तक न किया जाए।
कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले किसी भी छात्र के लिए State Bar Council में Enrollment सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, क्योंकि इसी के बाद वह आधिकारिक रूप से वकालत शुरू कर सकता है। इसलिए इस आदेश ने छात्रों के करियर को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी।
मामला तेजी से बढ़ा और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने BCI के इस कदम पर कड़ी नाराज़गी जताई। इसके बाद BCI ने अपना विवादित आदेश वापस ले लिया और छात्रों के पंजीकरण पर लगी रोक समाप्त कर दी। यही आदेश इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह बना।
आदेश वापस लेने के बाद भी विवाद खत्म क्यों नहीं हुआ?
आदेश वापस लेने के बाद BCI ने नया स्पष्टीकरण जारी किया। परिषद ने कहा कि सदस्यों ने पहले जारी पत्र पर विस्तृत चर्चा की और सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि छात्रों को अपनी पसंद की किसी भी State Bar Council में पंजीकरण कराने का अधिकार होगा।
BCI ने साथ ही यह दावा भी किया कि उसे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी मिली है कि कुछ शिक्षक और बाहरी लोग कथित तौर पर छात्रों को उकसाने में शामिल थे। हालांकि परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को उसकी गलती के बिना परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
इसके कुछ समय बाद मनन मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस पर जारी अपने संदेश में छात्रों से खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनके किसी पत्र, संदेश या बयान से विद्यार्थियों की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो उन्हें इसका ईमानदारी से अफसोस है।
लेकिन वकील संगठनों का कहना था कि केवल आदेश वापस लेना और खेद जताना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जिस निर्णय से छात्रों के भविष्य पर असर पड़ा, उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग क्यों उठी? वकीलों की दो सबसे बड़ी मांगें

विवाद के बाद Bombay Bar Association ने मनन मिश्रा के खिलाफ़ कड़ा रुख अपनाया और उनके इस्तीफे की मांग की। इसके बाद All India Young Advocates Association और CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी प्रदर्शन का ऐलान किया।
प्रदर्शन में शामिल युवा अधिवक्ताओं के अनुसार उनकी दो प्रमुख मांगें हैं।
- पहली मांग—मनन मिश्रा का बिना शर्त इस्तीफा।
- दूसरी मांग—Bar Council of India में व्यापक संस्थागत सुधार और नियमित चुनावी सुधार।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं का कहना था कि मनन मिश्रा पिछले 14 वर्षों से BCI में शीर्ष पद पर बने हुए हैं। उनका आरोप है कि इतने लंबे कार्यकाल के बावजूद वकीलों के कल्याण, कानूनी शिक्षा या फर्जी डिग्री वाले अधिवक्ताओं पर प्रभावी सुधार दिखाई नहीं दिए।
युवा अधिवक्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि स्वयं BCI यह कहती है कि देश में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्री वाले अधिवक्ता मौजूद हैं, तो फिर नियामक संस्था होने के नाते इस समस्या पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन सभी आरोपों को प्रदर्शनकारियों ने नैतिक जवाबदेही का आधार बताते हुए इस्तीफे की मांग से जोड़ा।
Bar Council of India (BCI) क्या है और यह विवाद इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
Bar Council of India केवल एक सामान्य संस्था नहीं, बल्कि भारत में अधिवक्ताओं और कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था है। यही संस्था कानून महाविद्यालयों की मान्यता, अधिवक्ताओं के पंजीकरण, पेशेवर आचार संहिता और कई महत्वपूर्ण नियामक अधिकारों का संचालन करती है।
इसी वजह से NALSAR छात्रों के Enrollment से जुड़ा आदेश केवल एक विश्वविद्यालय का मामला नहीं माना गया। वकीलों का तर्क है कि जब नियामक संस्था का कोई निर्णय सीधे छात्रों के करियर को प्रभावित करता है, तब उस निर्णय में पारदर्शिता, संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है।
दूसरी ओर, BCI का कहना है कि उसका उद्देश्य छात्रों को नुकसान पहुँचाना नहीं था और आदेश वापस लेकर छात्रों के हितों की रक्षा की गई। अब देखना होगा कि विरोध प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग और संस्थागत सुधार की बहस आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ती है, क्योंकि यह विवाद केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि भारत की कानूनी शिक्षा और अधिवक्ता व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
प्रदर्शन में सौरभ दास और युवा अधिवक्ताओं ने क्या कहा?
प्रदर्शन का समर्थन करते हुए CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि वे हर उस शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ खड़े हैं जो सार्वजनिक संस्थाओं में जवाबदेही की मांग करता है। उनके अनुसार यह विवाद किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि कानून के छात्रों और युवा वकीलों के भविष्य का मुद्दा है।
वहीं मंच से बोलने वाले अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि Bar Council जैसी सर्वोच्च नियामक संस्था में लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के बने रहने से सुधार की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उनका तर्क था कि संस्थाओं में समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन और लोकतांत्रिक चुनाव होने चाहिए, ताकि जवाबदेही बनी रहे।
प्रदर्शन में शामिल कई वकीलों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद क्यों पीछे हटना पड़ा BCI को?
NALSAR के छात्रों का Enrollment रोकने वाला BCI का आदेश जैसे ही सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, पूरे विवाद ने नया मोड़ ले लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि आखिर किसी विश्वविद्यालय के पूरे बैच के छात्रों के भविष्य को एक प्रशासनिक आदेश से क्यों रोका जा रहा है।
कोर्ट की टिप्पणी का सीधा संदेश यही था कि यदि कुछ छात्रों के विरोध या किसी विवाद की जांच हो रही है, तो उसकी वजह से पूरे 2026 बैच के कानून छात्रों के वकालत में पंजीकरण पर रोक लगाना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत की नाराज़गी के बाद BCI पर अपना फैसला दोबारा विचार करने का दबाव बढ़ा।
इसी घटनाक्रम के बाद Bar Council of India ने अपना विवादित आदेश वापस ले लिया और संशोधित निर्णय जारी करते हुए कहा कि 2026 बैच के छात्र अपनी पसंद की किसी भी राज्य बार काउंसिल में Enrollment करा सकेंगे। यही वह मोड़ था, जहाँ छात्रों के भविष्य पर लगी सबसे बड़ी अनिश्चितता खत्म हुई, लेकिन मनन मिश्रा के फैसले और जवाबदेही को लेकर उठी बहस जारी रही।
इस मामले में अब तक क्या हुआ? (Timeline)
| तारीख | घटनाक्रम |
| NALSAR विवाद | Enrollment order जारी |
| Supreme Court | BCI पर नाराज़गी |
| BCI | आदेश वापस |
| 18 Aug | Bombay Bar Association की मांग |
| 20 Aug | Lawyers Protest |



